अगर आप भारत में अपनी किताब छापने की सोच रहे हैं, तो आपको यह कुछ मददगार हैं। पहले, अपनी पांडुलिपि लिखें और इसे संपादन करवाएं। इसके बाद , अलग-अलग प्रकाशन गृह के जांच करें और उनका नीतियों को ध्यान से देखें । आप स्वतः प्रकाशन का भी अवसर चुन सकते हैं, पर इसमे अधिक खर्चा और काम की आवश्यकता होगी। आखिरकार